आखिर संसद से दूर काहे बा भोजपुरी?

भारत जइसन देश में, भाषा खाली बात करे के साधन ना ह,
बल्कि संस्कृति, पहचान आ लोकजीवन के आत्मा भी ह।
ओही में से एगो सबसे समृद्ध भाषा ह — भोजपुरी।
ई खाली पूर्वांचल के बोली ना ह,
बल्कि करोड़ों लोगन के भावना, संस्कार आ अस्मिता के पहचान ह।

फिर सवाल उठे ला —
“आखिर संसद से दूर काहे बा भोजपुरी?”

🌾 लोकभाषा से लोकशक्ति लेके

भोजपुरी आज भारत के सबसे जादे बोले जाए वाली भाषा में गिनल जाला।
नेपाल, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, मलेशिया से लेके अमेरिका तक
भोजपुरी के गूंज सुने के मिलेला।
विदेश में भोजपुरी खाली बोली ना,
बल्कि भारतीय संस्कृति के पहचान आ गौरव के प्रतीक बन गइल बिया।

फिरो आज ले भोजपुरी के भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में जगह नइखे मिलल।
जबकि मैथिली, संथाली, डोगरी, मणिपुरी, बोडो जइसन भाषा सभ
पहिले से मान्यता पा चुकल बाड़ी सन।

🗣️ राजनीति में चर्चा, संसद में चुप्पी

हर चुनाव में भोजपुरी के सम्मान आ संवैधानिक दर्जा के वादा त जरूर होला,
नेता मंच से भोजपुरी बोलेलें, जनता खुशी मनावेला,
बाकी संसद में जब बात आगे बढ़े के चाहीं,
त भोजपुरी फेरू विचाराधीन रहि जाला।

ई सिरिफ भाषा के अनदेखी ना,
बल्कि करोड़ों भोजपुरी बोलनवाला जन के सम्मान आ पहचान के अनादर ह।

📜 भोजपुरी के योगदान आ महत्व

भोजपुरी साहित्य, गीत, नाटक, आ सिनेमा में अपार योगदान देले बिया।
लोकगीतन में मातृभूमि के प्रेम बा,
हर तरह के भोजपुरी में साहित्‍य अउर साहित्‍यकार लोग बा,
भोजपुरी सिनेमा में जनभावना के गहराई बा,
आ हर गीत में अपने मिट्टी के खुशबू बा।

 

भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता
सिरिफ भाषा के हक नइखे,
बल्कि भारत के संस्कृतिक एकता आ विविधता के सम्मान के एगो प्रतीक होई।

🔸 अब समय आ गइल – आवाज़ एक होखे के

अब ज़रूरत बा कि हर भोजपुरी बोलनवाला
एक स्वर में कहे —
“भोजपुरी के हक चाहीं, सम्मान चाहीं!”

काहे कि जवन भाषा जनमानस के आत्मा होला,
ओके संसद से दूर राखल
सिरिफ अन्याय ना,
बल्कि आपन संस्कृति से दूरी बनावे के बराबर ह।

🕊️ “भोजपुरी के सम्मान में बा – भारत के सम्मान।”

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🌞 छठ पूजा के महत्त्व

छठ पर्व पूर्वांचल, बिहार, झारखंड, और उत्तर प्रदेश समेत पूरा देश में आस्था, शुद्धता और सूर्य उपासना के प्रतीक बा। ई पर्व भगवान सूर्य देव और छठी मईया के समर्पित होला।
लोकविश्वास अनुसार सूर्य देव जीवन, ऊर्जा और समृद्धि के दाता बानी। छठ पर्व के माध्यम से भक्तजन सूर्य देव के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करेलन और परिवार के सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य आ संतान की मंगल कामना करेलन।

छठ पर्व में सूर्योदय आ सूर्यास्त के बेला में अर्घ्य देहल जाला। ई समय प्रकृति के संग आत्मा के शुद्धिकरण के अनुभव करावल जाला। महिलाएँ कठोर व्रत रख के जल में खड़ा रह के पूजा करेली — जेकरा से सहनशीलता, त्याग आ भक्ति के अद्भुत संगम देखे के मिलेला।

छठ पर्व केवल पूजा ना ह —
प्रकृति, परिवार आ सामाजिक एकता के उत्सव ह।
जेकरा में लोग एक दोसरा के मदद करेला, गली-गली में गीत गूंजेला, आ हर घर में श्रद्धा के दीप जल जाला।

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